धरती कि शान तू भारत की सन्तान
तेरी मुथ्थियों में बन्ध तूफ़ान है रे
मनुष्य तू बडा महान है भूल मत
मनुष्य तू बडा महान है
तू जो चाहे पर्वत पहाडो को फोड दे
तू जो चाहे नदियों के मुख को भी मोड दे
तू जो चाहे माटी से अमृत निचोड दे
तू जो चाहे धरती को अम्बर से जोड दे
अमर तेरे प्राण -२
मिला तुझ को वरदान
तेरि आत्मा में स्वयं भगवान है रे
मनुष्य तू बडा महान है .....
नयनो से ज्वाल तेरी गति में भूचाल
तेरी छाति में छुपा महा काल है
पृथ्वी के लाल तेरा हिमगिरि सा भाल
तेरी भृकुटि में तान्डव का ताल है
निज को तू जान -२
जरा शक्ति पह्चान
तेरी वाणी में युग का आह्वान है रे
मनुष्य तू बडा महान है .....
धरती सा धीर तू है अग्नि सा वीर
तू जो चाहे तो काल को भी थाम ले
पापों का प्रलय रुके पशुता का शीश झुके
तू जो अगर हिम्मत से काम ले
गुरु सा मतिमान -२
पवन सा गतिमान
तेरी नभ से ऊँची उडान है रे
मनुष्य तू बडा महान है .....
धरती कि शान तू है भारत की सन्तान...
*****
No comments:
Post a Comment