Saturday, 29 September 2018

मुझे प्रेम का पाठ पढ़ा दे कोई





मुझे वेद पुराण क़ुरान से क्या?

मुझे प्रेम का पाठ पढ़ा दे कोई

मुझे मंदिर मस्जिद जाना नही

मुझे हृदय मंदिर में पहुँचा दे कोई

जहा उँच नीच की बात नही

ना हो मंदिर मस्जिद चर्च जहाँ

ना हो पूजा नमाज़ में फ़र्क वहा

बस प्रेम ही प्रेम की सृष्टि मिले

अब नाव को खे के चलो वहाँ


मुझे वेद पुराण कुरान से क्या ?

मुझे सत्य का पाठ पढ़ा दे कोई ॥


मुझे मन्दिर मस्जिद जाना नहीं ।

मुझे प्रेम का रंग चढ़ा दे कोई ॥


जहाँ ऊंच या नीच का भेद नहीं ।

जहाँ जात या पात की बात नहीं ॥


न हो मन्दिर मस्जिद चर्च जहाँ ।

न हो पूजा नमाज़ मे फर्क कहीं ॥


जहाँ सत्य ही सार हो जीवन का ।

रिधवार सिंगार हो त्याग जहाँ ॥


जहाँ प्रेम ही प्रेम की सृष्टि मिले ।

चलो नाव को ले चले खे के वहाँ

Sunday, 23 September 2018

निरंजन वन में साधु अकेला खेलता है…..




निरंजन वन में साधु अकेला खेलता है।
निरंजन वन में जोगी अकेला खेलता है।। (टेक)
भख्खड़ ऊपर तपे निरंजन अंग भभूति लगाता है।
कपड़ा लत्ता कुछ नहीं पहने हरदम नंगा रहता है।।
निरंजन वन में...
भख्खड़ ऊपर गौ वीयाणी उसका दूध विलोता है।
मक्खन मक्खन साधु खाये छाछ जगत को पिलाता है।।
निरंजन वन में...
तन की कूंडी मन का सोटा, हरदम बगल में रखता है।
पाँच पच्चीसों मिलकर आवे, उसको घोंट पिलाता है।।
निरंजन वन में...
कागज की एक पुतली बनायी उसको नाच नचाता है।
आप ही नाचे आप ही गावे आप ही ताल मिलाता है।।
निरंजन वन में...
निर्गुण रोटी सबसे मोटी इसका भोग लगाता है।
कहत कबीर सुनो भाई साधो अमरापुर फिर जाता है।।
निरंजन वन में...



साधो! सहज समाधि भली।




साधो! सहज समाधि भली।
गुरु प्रताप भयो जा दिन से सुरति न अनंत चली॥ 
आँखन मूँदूँ कानन रुँदूँ, काया कष्ट न धारुँ।
खुले नयन से हँस-हँस देखूँ सुन्दर रुप निहारुँ॥ 
कहूँ सोई नाम, सुनूँ सोई सुमिरन, 
खाउँ पीउँ सोई पूजा 
गृह उद्यान एक सम लेखूँ भाव मिटाउँ दूजा॥ 
जहाँ-2 जाऊँ सोई परिक्रमा जो कछु करूं सो सेवा। 
जब सोउँ तब करूं दंडवत, पूजूँ और न देवा॥
शब्द निरंतर मनुआ राता, मलिन बासना त्यागी।
बैठत उठत कबहूँ न विसरै, ऐसी ताड़ी लागी॥
कहै कबीर यह उन मनि रहनी सोई प्रकट कर गाई।
 दुख सुख के एक परे परम सुख, तेहि सुख रहा समाई॥


Sunday, 16 September 2018

कलजुग नहीं..... करजुग है यह





कलजुग नहीं करजुग है यह, यहाँ दिन को दे अरु रात ले।
क्या खूब सौदा नकद है, इस हाथ दे उस हाथ ले।। टेक
दुनियाँ अजब बाज़ार है, कुछ जिन्स1 यां कि साथ ले।
नेकी का बदला नेक है, बद से बदी की बात ले।।
मेवा खिला, मेवा मिले, फल फूल दे, फल पात ले।
आराम दे, आराम ले, दुःख दर्द दे, आफत2 ले।। 1 ।।
काँटा किसी को मत लगा गो मिस्ले-गुल3 फूला है तू।
वह तेरे हक4 में तीर है, किस बात पर झूला है तू।।
मत आग में डाल और को, क्या घास का पूला है तू।
सुन ऱख यह नकता5 बेखबर, किस बात पर भूला है तू।।
कलजुग नहीं...।। 2 ।।
शोखी शरारत मकरो-फन6 सबका बसेखा7 है यहाँ।
जो जो दिखाया और को, वह खुद भी देखा है यहाँ।।
खोटी खरी जो कुछ कही, तिसका परेखा8 है यहाँ।
जो जो पड़ा तुलता है मोल, तिल तिल का लेखा है यहाँ।।
कलजुग नहीं...।। 3 ।।
जो और की बस्ती9  रखे, उसका भी बसता है पूरा।
जो और के मारे छुरी, उसको भी लगता है छुरा।।
जो और की तोड़े घड़ी, उसका भी टूटे है घड़ा।
जो और की चेते10 बदी, उसका भी होता है बुरा।।
कलजुग नहीं... ।। 4 ।।
जो और को फल देवेगा, वह भी सदा फल पावेगा।
गेहूँ से गेहूँ, जौ से जौ, चाँवल से चाँवल पावेगा।।
जो आज देवेगा, यहाँ, वैसा ही वह कल पावेगा।
कल देवेगा, कल पावेगा, फिर देवेगा, फिर पावेगा।।
कलजुग नहीं... ।। 5 ।।
जो चाहे ले चल इस घड़ी, सब जिन्स यहाँ तैयार है।
आराम में आराम है, आजार में आजार11 है।।
दुनियाँ न जान इसको मियाँ, दरया की यह मझधार है।
औरों का बेड़ा पार कर, तेरा भी बेड़ा पार है।।
कलजुग नहीं... ।। 6 ।।
तू और की तारीफ कर, तुझको सनाख्वानी12 मिले।
कर मुश्किल आसां औरों की, तुझको, भी आसानी मिले।।
तू और को मेहमान कर, तुझको भी मेहमानी मिले।
रोटी खिला रोटी मिले, पानी पिला पानी मिले।।
कलजुग नहीं... ।। 7 ।।
जो गुल13 खिलावे और का उसका ही गुल खिलता भी है।
जो और का कीले14 है मुँह, उसका ही मुँह किलता भी है।।
जो और का छीले जिगर, उसका जिगर छिलता भी है।
जो और को देवे कपट, उसको कपट मिलता भी है।।
कलजुग नहीं... ।। 8 ।।
कर जो कुछ करना है अब, यह दम तो कोई आन15 है।
नुकसान में नुकसान है, एहसान में एहसान है।।
तोहमत में यहाँ तोहमत मिले, तूफान में तूफान है।
रेहमान16 को रहमान17 है, शैतान को शैतान है।।
कलजुग नहीं... ।। 9 ।।
यहाँ जहर दे तो जहर ले, शक्कर में शक्कर देख ले।
नेकों का नेकी का मजा, मूजी18 को टक्कर देख ले।।
मोती दिये मोती मिले, पत्थर में पत्थर देख ले।
गर तुझको यह बावर19 नहीं तो तू भी करके देख ले।।
कलजुग नहीं... ।। 10 ।।
अपने नफे के वास्ते, मत और का नुकसान कर।
तेरा भी नुकसां होवेगा, इस बात पर तू ध्यान कर।।
खाना जो खा सो देखकर, पानी पिये तो छानकर।
यां पाँवों को रख फूँककर, और खोफ से गुजरान कर।।
कलजुग नहीं... ।। 11 ।।
गफलत की यह जगह नहीं, तू साहिबे-इदराक20 रह।
दिलशाद21 ऱख दिल शाह रह, गमनाक रख गमनाक रह।।
हर हाल में भी तू नजीर22 अब हर कदम की रह।
यह वह मकां है ओ मियाँ! याँ पाक23 रह बेबाक24 रह।।
कलजुग नहीं... ।। 12 ।।

1. वस्तु 2. मुसीबत, 3. पुष्प की तरह 4. तेरे लिये 5. रहस्य 6. दगा-धोखा 7. घर 8. परखना 9. नगरी 10. विचार करें 11. दुःख 12. तारीफ-स्तुति 13. फूल 14. किसी को बोलने न देना 15. घड़ी, पल 16. दयावान 17. दयालु भगवान 18. सताने वाला 19. विश्वास 20. तीव्र दृष्टा, तेज समझने वाला पुरूष 21. प्रसन्नचित्त 22. कवि का नाम है 23. शुद्ध पवित्र 24 निडर।


*****



तेरे गिरने में, तेरी हार नहीं



तेरे गिरने में, तेरी हार नहीं ।
तू आदमी है, अवतार नहीं ।।
गिर, उठ, चल, दौड, फिर भाग,
क्योंकि
जीत संक्षिप्त है इसका कोई सार नहीं ।।

वक्त तो रेत है
फिसलता ही जायेगा
जीवन एक कारवां है
चलता चला जायेगा
मिलेंगे कुछ खास
इस रिश्ते के दरमियां
थाम लेना उन्हें वरना
कोई लौट के न आयेगा

सुबह का प्रणाम सिर्फ रिवाज़ ही नही
बल्कि आपकी फिक्र का एहसास भी है..

रिश्ते जिन्दा रहें और यादें भी बनी रहे..

जागो तो एक बार हिंदु जागो तो


जागो तो एक बार हिंदु जागो तो ॥धृ॥
जागे थे प्रताप शिवाजी मार भगाये मुल्ला काझी
मच गयी हा हा कार हिंदु जागो तो ॥१॥
जागे थे गुरु गोविन्द प्यारे देश पे चारो बच्चे वारे
वार दिया परिवार हिंदु जागो तो ॥२॥
जागी थी झांसी की रानी अकेली थी पर हार न मानी
चमक उठी तलवार हिन्दु जागो तो ॥३॥
जागे थे भगत सिंग प्यारे असेम्ब्ली मे लग गये नारे
भडक गई सरकार हिन्दु जागो तो ॥४॥
भारत मा के सपूत जागे कश्मीर मे ध्वज लेहराए
भागे आतन्कवाद हिन्दु जागो तो ॥५॥
हिन्दु जागे देश जागे देश के सब दुश्मन भागे

बने ये हिन्दु राष्ट्र हिन्दु जगो तो ॥६॥

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चलो मन जायें घर अपने



चलो मन जायें घर अपने

चलो मन जायें घर अपने
इस परदेस में, ओ परदेस में
क्यों परदेसी राहें ये~
चलो मन जायें घर अपने ...

आँख जो भाये वो कोरा सपना
आँख जो भाये वो कोरा सपना,
सारे पराये हैं कोई न अपना \-२
ऐसे झूटे प्रेम में पड़ ना भूल में काहे जियें~
चलो मन जायें घर अपने ...

सच्चे प्रेम की ज्योत जला के
सच्चे प्रेम की ज्योत जला के,
मन सुन मेरे कान लगा के \-२
पाप और पुण्य की गडरी उठा के अपनी राह चलें~
चलो मन जायें घर अपने ...


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वैष्णव जन तो


वैष्णव जन तो तेने कहिये जे
पीड़ परायी जाणे रे

पर दुख्खे उपकार करे तोये
मन अभिमान ना आणे रे
वैष्णव जन तो तेने कहिये जे ...

सकळ लोक मान सहुने वंदे
नींदा न करे केनी रे
वाच काछ मन निश्चळ राखे
धन धन जननी तेनी रे
वैष्णव जन तो तेने कहिये जे ...

सम दृष्टी ने तृष्णा त्यागी
पर स्त्री जेने मात रे
जिह्वा थकी असत्य ना बोले
पर धन नव झाली हाथ रे
वैष्णव जन तो तेने कहिये जे ...

मोह माया व्यापे नही जेने
द्रिढ़ वैराग्य जेना मन मान रे
राम नाम सुन ताळी लागी
सकळ तिरथ तेना तन मान रे
वैष्णव जन तो तेने कहिये जे ...

वण लोभी ने कपट- रहित छे
काम क्रोध निवार्या रे
भणे नरसैय्यो तेनुन दर्शन कर्ता
कुळ एकोतेर तारया रे

वैष्णव जन तो तेने कहिये जे …


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मनुष्य तू बडा महान है

धरती कि शान तू भारत की सन्तान
तेरी मुथ्थियों में बन्ध तूफ़ान है रे
मनुष्य तू बडा महान है भूल मत
मनुष्य तू बडा महान है

तू जो चाहे पर्वत पहाडो को फोड दे
तू जो चाहे नदियों के मुख को भी मोड दे
तू जो चाहे माटी से अमृत निचोड दे
तू जो चाहे धरती को अम्बर से जोड दे
अमर तेरे प्राण -२
मिला तुझ को वरदान
तेरि आत्मा में स्वयं भगवान है रे
मनुष्य तू बडा महान है .....

नयनो से ज्वाल तेरी गति में भूचाल
तेरी छाति में छुपा महा काल है
पृथ्वी के लाल तेरा हिमगिरि सा भाल
तेरी भृकुटि में तान्डव का ताल है
निज को तू जान -२
जरा शक्ति पह्चान
तेरी वाणी में युग का आह्वान है रे
मनुष्य तू बडा महान है .....

धरती सा धीर तू है अग्नि सा वीर
तू जो चाहे तो काल को भी थाम ले
पापों का प्रलय रुके पशुता का शीश झुके
तू जो अगर हिम्मत से काम ले
गुरु सा मतिमान -२
पवन सा गतिमान
तेरी नभ से ऊँची उडान है रे
मनुष्य तू बडा महान है .....

धरती कि शान तू है भारत की सन्तान...

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मनमोहन कान्हा







मनमोहन कान्हा विनती करू दिन रैन
मनमोहन कान्हा बिनती करू दिन रैन
राह तके मेरे नैन
राह तके मेरे नैन
अब तो राह दरस दे दो कुंजबिहारी
मनवा है बेचेन
मन मोहन कान्हा
विनती करू दिन रैन
नेह की डोरी तुम संग जोड़ी
हम से तो नाही जाए ये तोडी
हे मुरलीधर कृष्ण मुरारी
हे मुरलीधर कृष्ण मुरारी
तनिक ना आवे चैन
राह तके मेरे नैन
राह तके मेरे नैन
अब तो तरस दे दो कुंजबिहारी
मनवा है बेचेन
मन मोहन कान्हा
विनती करू दिन रैन
मन मोहन कान्हा
विनती करू दिन रैन

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