Sunday, 16 September 2018

चलो मन जायें घर अपने



चलो मन जायें घर अपने

चलो मन जायें घर अपने
इस परदेस में, ओ परदेस में
क्यों परदेसी राहें ये~
चलो मन जायें घर अपने ...

आँख जो भाये वो कोरा सपना
आँख जो भाये वो कोरा सपना,
सारे पराये हैं कोई न अपना \-२
ऐसे झूटे प्रेम में पड़ ना भूल में काहे जियें~
चलो मन जायें घर अपने ...

सच्चे प्रेम की ज्योत जला के
सच्चे प्रेम की ज्योत जला के,
मन सुन मेरे कान लगा के \-२
पाप और पुण्य की गडरी उठा के अपनी राह चलें~
चलो मन जायें घर अपने ...


*****




No comments:

Post a Comment