Sunday, 16 September 2018

कलजुग नहीं..... करजुग है यह





कलजुग नहीं करजुग है यह, यहाँ दिन को दे अरु रात ले।
क्या खूब सौदा नकद है, इस हाथ दे उस हाथ ले।। टेक
दुनियाँ अजब बाज़ार है, कुछ जिन्स1 यां कि साथ ले।
नेकी का बदला नेक है, बद से बदी की बात ले।।
मेवा खिला, मेवा मिले, फल फूल दे, फल पात ले।
आराम दे, आराम ले, दुःख दर्द दे, आफत2 ले।। 1 ।।
काँटा किसी को मत लगा गो मिस्ले-गुल3 फूला है तू।
वह तेरे हक4 में तीर है, किस बात पर झूला है तू।।
मत आग में डाल और को, क्या घास का पूला है तू।
सुन ऱख यह नकता5 बेखबर, किस बात पर भूला है तू।।
कलजुग नहीं...।। 2 ।।
शोखी शरारत मकरो-फन6 सबका बसेखा7 है यहाँ।
जो जो दिखाया और को, वह खुद भी देखा है यहाँ।।
खोटी खरी जो कुछ कही, तिसका परेखा8 है यहाँ।
जो जो पड़ा तुलता है मोल, तिल तिल का लेखा है यहाँ।।
कलजुग नहीं...।। 3 ।।
जो और की बस्ती9  रखे, उसका भी बसता है पूरा।
जो और के मारे छुरी, उसको भी लगता है छुरा।।
जो और की तोड़े घड़ी, उसका भी टूटे है घड़ा।
जो और की चेते10 बदी, उसका भी होता है बुरा।।
कलजुग नहीं... ।। 4 ।।
जो और को फल देवेगा, वह भी सदा फल पावेगा।
गेहूँ से गेहूँ, जौ से जौ, चाँवल से चाँवल पावेगा।।
जो आज देवेगा, यहाँ, वैसा ही वह कल पावेगा।
कल देवेगा, कल पावेगा, फिर देवेगा, फिर पावेगा।।
कलजुग नहीं... ।। 5 ।।
जो चाहे ले चल इस घड़ी, सब जिन्स यहाँ तैयार है।
आराम में आराम है, आजार में आजार11 है।।
दुनियाँ न जान इसको मियाँ, दरया की यह मझधार है।
औरों का बेड़ा पार कर, तेरा भी बेड़ा पार है।।
कलजुग नहीं... ।। 6 ।।
तू और की तारीफ कर, तुझको सनाख्वानी12 मिले।
कर मुश्किल आसां औरों की, तुझको, भी आसानी मिले।।
तू और को मेहमान कर, तुझको भी मेहमानी मिले।
रोटी खिला रोटी मिले, पानी पिला पानी मिले।।
कलजुग नहीं... ।। 7 ।।
जो गुल13 खिलावे और का उसका ही गुल खिलता भी है।
जो और का कीले14 है मुँह, उसका ही मुँह किलता भी है।।
जो और का छीले जिगर, उसका जिगर छिलता भी है।
जो और को देवे कपट, उसको कपट मिलता भी है।।
कलजुग नहीं... ।। 8 ।।
कर जो कुछ करना है अब, यह दम तो कोई आन15 है।
नुकसान में नुकसान है, एहसान में एहसान है।।
तोहमत में यहाँ तोहमत मिले, तूफान में तूफान है।
रेहमान16 को रहमान17 है, शैतान को शैतान है।।
कलजुग नहीं... ।। 9 ।।
यहाँ जहर दे तो जहर ले, शक्कर में शक्कर देख ले।
नेकों का नेकी का मजा, मूजी18 को टक्कर देख ले।।
मोती दिये मोती मिले, पत्थर में पत्थर देख ले।
गर तुझको यह बावर19 नहीं तो तू भी करके देख ले।।
कलजुग नहीं... ।। 10 ।।
अपने नफे के वास्ते, मत और का नुकसान कर।
तेरा भी नुकसां होवेगा, इस बात पर तू ध्यान कर।।
खाना जो खा सो देखकर, पानी पिये तो छानकर।
यां पाँवों को रख फूँककर, और खोफ से गुजरान कर।।
कलजुग नहीं... ।। 11 ।।
गफलत की यह जगह नहीं, तू साहिबे-इदराक20 रह।
दिलशाद21 ऱख दिल शाह रह, गमनाक रख गमनाक रह।।
हर हाल में भी तू नजीर22 अब हर कदम की रह।
यह वह मकां है ओ मियाँ! याँ पाक23 रह बेबाक24 रह।।
कलजुग नहीं... ।। 12 ।।

1. वस्तु 2. मुसीबत, 3. पुष्प की तरह 4. तेरे लिये 5. रहस्य 6. दगा-धोखा 7. घर 8. परखना 9. नगरी 10. विचार करें 11. दुःख 12. तारीफ-स्तुति 13. फूल 14. किसी को बोलने न देना 15. घड़ी, पल 16. दयावान 17. दयालु भगवान 18. सताने वाला 19. विश्वास 20. तीव्र दृष्टा, तेज समझने वाला पुरूष 21. प्रसन्नचित्त 22. कवि का नाम है 23. शुद्ध पवित्र 24 निडर।


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