Sunday, 25 August 2019

नलिनी दलगत जल मति तरलम






 नलिनी दलगत जल मति तरलम
तद वज्जीवितम अतिशय चपलम
विद्धि व्याध्य अभिमाना ग्रसतम
लोकं शोकहतम च समस्तं

काते कांता कस्ते पुत्रः
संसारो यमतीव विचित्र:
कस्य त्वं क: कुत आयातः
तत्त्वं चिन्तया तदिह भ्रातः

सत्संगत्वे निस्संगत्वं
निस्संगत्वे निर्मोहत्वं,
निर्मोहत्वे निश्चलतत्वं
निश्चलतत्वे जीवनमुक्तिः

वयासिगते कः काम विकारः
शुष्के नीरे क: कासारः
क्षीणे वित्ते क: परिवार:
ज्ञाते तत्त्वे कः संसार

भजगोविन्दम भजगोविन्दम
गोविन्दम भजमूढ़मते
संप्राप्ते सन्निहिते काले
नही नही रक्षति डुंक्रुजकरणे****



 


Thursday, 31 January 2019

मात पिता गुरु प्रभू चरणों में





मात पिता गुरु प्रभू चरणों में प्रणमत बरंबार
हम पर किया बहुत उप्कार, हम पर किया बहुत उप्कार

माता ने जो कष्ट उठाया,
वह ऋण कभी न जाये चुकाया
उँगली पकड़ कर चलना सिखाया
ममता की दी शीतल छाया,
जिनकी गोदी में पलकर हम कहलाते हुशियार
हम पर किया बहुत उप्कार ...

पिता ने हमको योग्य बनाया,
कमा कमा कर अन्न खिलाया
पढ़ा लिखा गुणवान बनाया,
जीवन पथ पर चलना सिखाया
जोड़ जोड़ अपनी संपत्ति का बना दिया हकदार
हम पर किया बहुत उप्कार ...

तत्व ज्ञान गुरु ने दर्शाया,
अंधकार सब दूर हटाया
हृदय में भक्ति दीप जलाकर,
हरि दर्शन का मार्ग बताया
बिन स्वारथ हो कृपा करें वे इतने बड़े हैं उदार
हम पर किया बहुत उप्कार ...

प्रभु कृपा से नर तन पाया
संत मिलन का साज सजाया
बल बुद्धि और विद्या देकर
सब जीवों में श्रेष्ठ बनाय
जो भी इनकी शरण में आता, कर देता उद्धार
हम पर किया बहुत उप्कार ...