Saturday, 22 April 2023
राम नाम की लूट है
Sunday, 16 April 2023
सबका मंगल सबका भला हो
सबका मंगल सबका भला हो गुरु चाहना ऐसी है।।टेक।।
इसीलिए तो आये धरा पर सदगुरु आशारामजी हैं।
सबका मंगल सबका....
भारत का नया रूप बनाने, विश्वगुरु के पद पे बिठाने,
योग सिद्धि के खोले खजाने, ज्ञान के झरने फिर से बहाने।
सबका मंगल सबका....।।टेक।।
युवाधन को ऊपर उठाने, यौवन-संयम पाठ सिखाने,
जन-जन भक्ति शक्ति जगाने, निकल पड़े गुरु राम निराले।
सबका मंगल सबका.....।।टेक।।
इक-इक बच्ची शबरी-सी हो, मीरा जैसी योगिनी हो,
सती अनसूया सती सीता हो, मुख पर तेज माँ शक्ति का हो।
सबका मंगल सबका.....।।टेक।।
नर-नर में नारायण दर्शन, सेवा कर फल प्रभु को अर्पण,
दीन-दुःखी को गले लगायें, सबका भला हो मन से गायें।
सबका मंगल सबका भला हो गुरु चाहना ऐसी है।।-3
मातृ-पितृ पूजन की राह दिखाने वाले
मातृ-पितृ पूजन की राह दिखाने वाले
भला हो तेरा नींद से हमें जगाने वाले
कलियुग में सतयुग को मोड़ के लानेवाले
भला हो तेरा नींद से हमें जगानेवाले
संयम शिक्षा का ज्ञान देके चमकाने वाले
रोग-शोक-भय मुक्त समाज बनाने वाले
घर-घर पावन प्रेम की सरिता बहाने वाले
भला हो तेरा सच्ची राह दिखाने वाले
जन-जन के जीवन में प्रभुरस लाने वाले
मातृ-पितृ पूजन की राह दिखाने वाले
भला हो तेरा ,भला हो तेरा
भला हो तेरा सच्ची राह दिखाने वाले
टूटे बिखरे परिवारों को मिलाने वाले
करके अथक प्रयास धरा महकाने वाले
मात-पिता का खोया मान दिलाने वाले
भला हो तेरा सत्य का मार्ग बताने वाले
पूजन से बच्चों का ह्रदय खिलाने वाले
मातृ-पितृ पूजन की राह दिखाने वाले
भला हो तेरा ,भला हो तेरा
भला हो तेरा ज्ञान की गंगा बहाने वाले
Saturday, 15 April 2023
आओ जी आओ गुरु जी
आओ जी आओ गुरु जी आओ,
ना होर तरसाओ के दरस दिखाओ गुरु जी आओ जी,
आओ जी आओ गुरु जी आओ,
एक एक पल गुरु जी तुम बिन सालो जैसा लगता,
इन आखियो को गुरु जी तुम बिन और न को जचता,
मेरे सुने मन मंदिर में आके फेरा पाओ जी,
आओ जी आओ गुरु जी आओ....
जब तक प्राण है गुरु जी तुम को हर पल मैं ध्याऊ,
स्वास स्वास में तुम को सिमरु दर्श तुम्हारा पाउ,
मेरे साथ मिल कर तुम भी गुण गुरु के गाओ जी,
आओ जी आओ गुरु जी आओ
ध्यान करू मैं मगन रहु मैं चरणों में तुम्हारे,
तुम ही तुम हो और नहीं कोई नैनो में हमारे,
झलक दिखाओ पास भुलाओ और न अब तरसाओ जी,
आओ जी आओ गुरु जी आओ जी
Sunday, 9 April 2023
जय सदगुरु देवन देव वरं,
जय सदगुरु देवन देव वरं, निज भक्तन रक्षण देह धरम।
पर दुःख हरम सुख शांति करं निरुपधि निरामय दिव्य परम ।।1।।
जय काल अबाधित शांति मयं, जन पोषक शोषक ताप त्रयं।
भय भंजन देत परम अभयं , मन रंजन भाविक भाव प्रियं।।2।।
ममतादिक दोष नशावत है, शम आदिक भाव सिखावत है ।
जग जीवन पाप निवारत है, भव सागर पार उतारत है ।।3।।
कहूँ धर्म बतावत ध्यान कहीं, कहूँ भक्ति सिखावत ज्ञान कहीं।
उपदेशत नेम अरु प्रेम तुम्ही, करते प्रभु योग और क्षेम तुम्ही।।4।।
मन इन्द्रिय जाहिं न जान सके, नहीं बुद्धि जिसे पहचान सके।
नहीं शब्द जहां पर जाय सके , बिनु सद्गुरु को पहुँचाय सके।।5।।
नहीं ध्यान न ध्यातृ न ध्येय जहाँ, नहीं ज्ञातृ न ज्ञान न ज्ञेय जहाँ।
नहीं देश न काल न वस्तु तहाँ, विनु सद्गुरु को पहुँचाय वहाँ।।6।।
नहीं रूप न लक्षण ही जिसका , नहीं नाम न धाम कहीं जिसका ।
नहीं सत्य असत्य कहाय सके , गुरुदेव ही ताहि जनाय सके ।।7।।
गुरु किन कृपा भव त्रास गयी, मिट भूख गयी छूट प्यास गयी।
नहीं काम रहा नहीं कर्म रहा , नहीं मृत्यु रहा नहीं जन्म रहा।।8।।
भग राग गया हट द्वेष गया , अघ चूर्ण भया अणु पूर्ण भया
नहीं द्वेत रहा सम एक भया, भ्रम भेद मिटा मम तोर गया।।9।।
नहीं मैं नहीं तू नहीं अन्य रहा , गुरु शास्वत आप अनन्य रहा।
गुरु सेवत ते नर धन्य यहाँ, तिनको नहीं दुःख यहाँ न वहाँ।।10।।
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ऐ मेरे सद्गुरु प्यारे
ऐ मेरे सद्गुरु प्यारे
तेरा जन्म है कैसा रूहानी
तेरे तन मन धन की तपस्या
तेरे जीवन की कुर्बानी
जब हम बैठे थे सुखों में
तू सुखा रहा था तन को
जब हम बैठे थे घरों में
तू भुला रहा था मन को
जग में रहकर सब भूला
न भोजन चाहा न पानी
तेरे तन मन धन की तपस्या
तेरे जीवन की कुर्बानी
गुरू दर पर सेवा थे करते
हाथों से खून था बहता
पर गुरू सेवा में तत्पर
इस देह का भान था भुलता
संकल्प यही बस दृढ़ था
गुरू आज्ञा प्रथम निभानी
तेरे तन मन धन की तपस्या
तेरे जीवन की कुर्बानी
गुरूदेव के प्रेम की खातिरI
हर दिन सहते थे तितिक्षा
दिन रैन वो ज्वाला से थे
हर पल थी अग्नि परीक्षा
हर मूल्य पे लक्ष्य को पाना
ये बात थी मन में ठानी
तेरे तन मन धन की तपस्या
तेरे जीवन की कुर्बानी
नगरसेठ कहलाने वाला
गुरुदर पे मरता मिटता
तेरी मर्जी पूरण हो
ये ध्यान हृदय में धरता
बस निराकार ने थामा
न होने दी कुछ हानी
तेरे तन मन धन की तपस्या
तेरे जीवन की कुर्बानी
वो कैसी रातें होंगी
प्रभुप्रेम में जब तू रोया
दुनिया थी नींद में सोती
तू अपने आप में खोया
अति दिव्य हैं और अलौकिक
तेरी महिमा न जाए बखानी
तेरे तन मन धन की तपस्या
तेरे जीवन की कुर्बानी
माँ का आँचल बिसराया
पत्नी का प्रेम ठुकराया
किन किन राहों पे चलके
इस ब्रह्मज्ञान को पाया
फिर आत्म में ही रहा तू
चालीस दिन की वो निशानी
तेरे तन मन धन की तपस्या
तेरे जीवन की कुर्बानी
आसोज सुद्ध दो दिन
और संवत बीस इक्कीस
मध्यान्ह ढाई बजे
मिल गया ईश से ईश
पानी में मिल गया पानी
फिर दोनों हो गए फानी
तेरे तन मन धन की तपस्या
तेरे जीवन की कुर्बानी
ये रोशनी कैसी हैं फूटी
जग गई हैं सारी धरती
अंबर भी प्रकाश से फूटा
नस-नस में ज्योति भर दी
सब जड़ और चेतन जागा
लगे संत की बात फैलानी
तेरे तन मन धन की तपस्या
तेरे जीवन की कुर्बानी
गुरू सत्य का रस पिलाया
तन मन हृदय में समाया
हर नस-नस में पहुँचा वो
हर रूह को ॐ जपाया
वो रस मेरी आँखों से छलके
गुरूप्रेम का बनकर पानी
तेरे तन मन धन की तपस्या
तेरे जीवन की कुर्बानी
हर तरफ हैं आत्म दर्शन
हर तरफ हैं नूर नुरानी
हर तरफ हैं तेरा उजाला
हर तरफ हैं तू ब्रह्मज्ञानी
सदियों तक जो गूँजेगी
हैं आज की तेरी कहानी
तेरे तन मन धन की तपस्या
तेरे जीवन की कुर्बानी
नर नारायण की सेवा करते
हैं अपना आपा लुटाया
गली -गली गाँव में जाकर
सबको ही सुख पहुँचाया
हैं विश्व शिखर पर चमका
भारत का रत्न नूरानी
तेरे तन मन धन की तपस्या
तेरे जीवन की कुर्बानी
हम ना भूलें उस तप को
कैसे तूने गुरू को रिझाया
किन-किन राहों पे चलके
इस ब्रह्मज्ञान को पाया
जन्मों की तपन मिटाए
ये ब्रह्म को छूती वाणी
तेरे तन मन धन की तपस्या
तेरे जीवन की कुर्बानी
इन कठिन पलों में भी तू
किस शान से हैं मुस्काया
जग को सत राह दिखाई
कष्टों में तन को तपाया
रो-रो इतिहास कहेगा
दी तूने जो कुर्बानी
तेरे तन मन धन की तपस्या
तेरे जीवन की कुर्बानी
सारी सृष्टि को उखाड़े
जब गुरू शेर हैं दहाड़े
इतना कुछ होने पर भी
ना जाने मौन क्यों धारे
दुनिया ने इतना सताया
फिर भी मुस्काए ज्ञानी
तेरे तन मन धन की तपस्या
तेरे जीवन की कुर्बानी
संस्कृति की रक्षक को ही
दुनिया ने जेल पहुँचाया
झूठे इल्जाम लगाकर
देखो संत को कैसे सताया
सूरज को कौन ढकेगा
वो स्वयं प्रकाश का स्वामी
तेरे तन मन धन की तपस्या
तेरे जीवन की कुर्बानी
ऐ मेरे सद्गुरु प्यारे
तू दे रहा कैसा इशारा
जैसा तू ब्रह्म में स्थित हैं
वैसा हो बोध हमारा...
तेरा मंगल मेरा मंगल
तेरा मंगल मेरा मंगल सब का मंगल होये रे,
जिस जन नी जन्म दियां है उसका मंगल होये रे,
तेरा मंगल मेरा मंगल सब का मंगल होये रे,
ताला पोछा और बढ़ाया पिता का मंगल होये रे,
जिस गुरु देव ने धर्म दिया है उसका मंगल होये रे,
इस जग के सब दुखियारे का मी का मंगल होये रे,
जल में थल में और गंगन में सब का मंगल होये रे,
तेरा मंगल मेरा मंगल सब का मंगल होये रे,
तेरा मंगल मेरा मंगल सब का मंगल होये रे,
अंतर मन की गाँठ ये टूटे अंतर निर्मल होये रे,
शुद्ध धर्म धरती पर जागे पाप पराजित होये रे,
इस धरती के तर दिन में कण कण में धर्म समाये रे,
तेरा मंगल मेरा मंगल सब का मंगल होये रे,
ॐ जय जय गौमाता,
ॐ जय जय गौमाता, मैया जय जय गौमाता ।
जो कोई तुमको ध्याता, त्रिभुवन सुख पाता । । मैया जय । ।
सुख समृद्धि प्रदायनी, गौ की कृपा मिले ।
जो करे गौ की सेवा, पल में विपत्ति टले । । मैया जय । ।
आयु ओज विकासिनी, जन जन की माई ।
शत्रु मित्र सुत जाने, सब की सुख दाई । । मैया जय । ।
सुर सौभाग्य विधायिनी, अमृती दुग्ध दियो ।
अखिल विश्व नर नारी, शिव अभिषेक कियो । । मैया जय । ।
ममतामयी मन भाविनी, तुम ही जग माता ।
जग की पालनहारी, कामधेनु माता । । मैया जय । ।
संकट रोग विनाशिनी, सुर महिमा गायी ।
गौ शाला की सेवा, संतन मन भायी । । मैया जय । ।
गौ माँ की रक्षा हित, हरी अवतार लियो ।
गौ पालक गौपाला, शुभ सन्देश दियो । । मैया जय । ।
श्री गौमात की आरती, जो कोई सुत गावे ।
"पदम्" कहत वे तरणी, भव से तर जावे । । मैया जय । ।
गुरूजी मेरी आरती स्वीकार कीजिए
गुरूजी मेरी आरती स्वीकार कीजिए
चरण में पड़े हैं उद्धार कीजिए
नैनों के दीपक में संजोए भक्ति भाव की बाती
आँसुओं का तेल भरा उम्मीद की लौ जलाती
ये ज्योत हृदय की उजियार कीजिए
गुरूजी मेरी आरती स्वीकार कीजिए
तरस रही अखियाँ व्यथित हुआ मन
लगी हुई हैं दिल को दरश की लगन
अब देके शीघ्र दर्शन कृतार्थ कीजिए
गुरूजी मेरी आरती स्वीकार कीजिए
जग में भटक रहे हैं दर दर ठोकर तुम बिन खाते
याद हैं आती हमको गुरूवर की प्यारी बातें
मिले गुरू दीदार ये उपकार कीजिए
गुरूजी मेरी आरती स्वीकार कीजिए
जीवन की ये काली रातें तुम बिन ऐसी बीते
चाँद दरश बिना चातक जैसे रहे रीत के रीते
दे के दरश हमको उबार लीजिए
गुरूजी मेरी आरती स्वीकार कीजिए
जैसे भी हैं तेरे ही हैं सारा जग ये जाने
सारे जग को छोड़के बापू तुमको अपना माने
व्यथा मेरी प्रभुजी अब देख लीजिए
गुरूजी मेरी आरती स्वीकार कीजिए
प्रभु की बाते होती जब हम संग जोगी के होते
बिन तेरे हे बापू हम सब हर पल हैं कुछ खोते
आके हमको खुशियाँ बेशुमार दीजिये
गुरूजी मेरी आरती स्वीकार कीजिए




