Sunday, 9 April 2023

गुरूजी मेरी आरती स्वीकार कीजिए





 गुरूजी मेरी आरती स्वीकार कीजिए

चरण में पड़े हैं उद्धार कीजिए


नैनों के दीपक में संजोए भक्ति भाव की बाती

आँसुओं का तेल भरा उम्मीद की लौ जलाती

ये ज्योत हृदय की उजियार कीजिए

गुरूजी मेरी आरती स्वीकार कीजिए


तरस रही अखियाँ व्यथित हुआ मन

लगी हुई हैं दिल को दरश की लगन

अब देके शीघ्र दर्शन कृतार्थ कीजिए

गुरूजी मेरी आरती स्वीकार कीजिए


जग में भटक रहे हैं दर दर ठोकर तुम बिन खाते

याद हैं आती हमको गुरूवर की प्यारी बातें

मिले गुरू दीदार ये उपकार कीजिए

गुरूजी मेरी आरती स्वीकार कीजिए


जीवन की ये काली रातें तुम बिन ऐसी बीते

चाँद दरश बिना चातक जैसे रहे रीत के रीते

दे के दरश हमको उबार लीजिए

गुरूजी मेरी आरती स्वीकार कीजिए


जैसे भी हैं तेरे ही हैं सारा जग ये जाने

सारे जग को छोड़के बापू तुमको अपना माने

व्यथा मेरी प्रभुजी अब देख लीजिए

गुरूजी मेरी आरती स्वीकार कीजिए


प्रभु की बाते होती जब हम संग जोगी के होते

बिन तेरे हे बापू हम सब हर पल हैं कुछ खोते

आके हमको खुशियाँ बेशुमार दीजिये

गुरूजी मेरी आरती स्वीकार कीजिए


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