Saturday, 31 January 2026

संत मिलन को जाइये - कवीर जी भजन


कबीर सोई दिन भला जा दिन साधु मिलाय।

अंक भरे भरि भेटिये पाप शरीरां जाय।।1।।

कबीर दरशन साधु के बड़े भाग दरशाय।

जो होवै सूली सजा काटे ई टरी जाय।।2।।

दरशन कीजे साधु का दिन में कई कई बार।

आसोजा का मेह ज्यों बहुत करै उपकार।।3।।

कई बार नहीं करि सकै दोय बखत करि लेय।

कबीर साधु दरस ते काल दगा नहीं देय।।4।।

दोय बखत नहीं करि सकै दिन में करू इक बार।

कबीर साधु दरस ते उतरे भौ जल पार।।5।।

दूजै दिन नहीं करि सकै तीजे दिन करू जाय।

कबीर साधु दरस ते मोक्ष मुक्ति फल पाय।।6।।

तीजे चौथै नहीं करै सातैं दिन करू जाय।

या में विलम्ब न कीजिये कहै कबीर समुझाय।।7।।

सातैं दिन नहीं करि सकै पाख पाख करि लेय।

कहे कबीर सो भक्तजन जनम सुफल करि लेय।।8।।

पाख पाख नहीं करि सकै मास मास करू जाय।

ता में देर न लाइये कहै कबीर समुझाय।।9।।

मात-पिता सुत इस्तरी आलस बन्धु कानि।

साधु दरस को जब चले ये अटकावै खानि।।10।।

इन अटकाया ना रहै साधू दरस को जाय।

कबीर सोई संत जन मोक्ष मुक्ति फल पाय।।11।।


ૐૐૐૐૐૐૐૐૐૐૐૐૐૐૐૐૐૐૐૐૐૐૐૐ

No comments:

Post a Comment