Friday, 14 June 2024

श्री गुरु-महिमा

 





गुरु बिन ज्ञान न उपजे, गुरु बिन मिटे न भेद ।

गुरु बिन संशय न मिटे, जय जय जय गुरूदेव ।।

तीरथ का है एक फल, संत मिले फल चार ।

सदगुरु मिले अनंत फल, कहत कबीर विचार ।।

भव भ्रमण संसार दुःख, ता का वार ना पार ।

निर्लाेभी सदगुरु बिना, कौन उतारे पार ।।

पूरा सदगुरु सेवतां, अंतर प्रगटे आप ।

मनसा वाचा कर्मणा, मिटें जन्म के ताप ।।

समदृष्टि सदगुरु किया, मेटा भरम विकार ।

जहँ देखो तहँ एक ही, साहिब का दीदार ।।

आत्मभ्रांति सम रोग नहीं, सदगुरु वैद्य सुजान ।

गुरु आज्ञा सम पथ्य नहीं, औषध विचार ध्यान ।।

सदगुरु पद में समात हैं, अरिहंतादि पद सब ।

तातैं सदगुरु चरण को, उपासौ तजि गर्व ।।

बिना नयन पावे नहीं, बिना नयन की बात ।

सेवे सदगुरु के चरण, सो पावे साक्षात ।।






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